इश्क़ मेरा मज़हब

  • जो ना हुआ था कभी

    अब वो सब हुआ

    ज़िंदगी में इत्तिफ़ाक़

    इक रोज़ ग़ज़ब हुआ

    तू मिल गया मुझे

    तू जीने का सबब हुआ

    मेरा सबकुछ बन गया तू

    तू मेरा रब हुआ

    तुझसे इश्क खुदा जाने

    मुझे कब हुआ

    अब ये इश्क मेरी पहचान

    मेरा मज़हब हुआ ।

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